मैं नास्तिक हूँ

मैं नास्तिक हूँ,

मेरी भी भावनाएँ आहत होती हैं—

जब मैं देखता हूँ,

स्वच्छ गंगा में डाली जाती हैं अस्थियाँ

और अधजले शरीरों के टुकड़े।


मैं नास्तिक हूँ,

मेरी भी भावनाएँ आहत होती हैं—

जब मैं देखता हूँ,

किसी मूर्ख इंसान ने मंदिर बनाकर

लगा दिया लाखों की भीड़ को कतार में।


मैं नास्तिक हूँ,

मेरी भी भावनाएँ आहत होती हैं—

जब मैं देखता हूँ,

एक बच्चा मंदिर के बाहर भूख से

अपनी आंतें चबाता है और ईश्वर

भीतर दूध से नहा रहे होते हैं।


मैं नास्तिक हूँ,

मेरी भी भावनाएँ आहत होती हैं—

जब मैं देखता हूँ,

गंगा में डुबकी लगाकर 'पाप' धोने का दावा करने वाला

घर लौटकर एक इंसान के छूने भर से 'अपवित्र' हो जाता है।


मैं नास्तिक हूँ,

मेरी भी भावनाएँ आहत होती हैं—

जब मैं देखता हूँ,

मेरी ही मानव जाति से संबंध रखने वाले

लोग पवित्रता के नाम पर

खा-पी रहे हैं गोबर और गोमूत्र।


मैं नास्तिक हूँ,

मेरी भी भावनाएँ आहत होती हैं—

जब मैं देखता हूँ,

मेरे ही लोगों को ठगा जा रहा है

किसी ज्योतिषी के द्वारा भविष्य की गणना करके।


मैं नास्तिक हूँ,

मेरी भी भावनाएँ आहत होती हैं—

जब मैं देखता हूँ,

लोग मरने-मारने को तैयार हो जाते हैं

अपने ईश्वर को बचाने के लिए।


मैं नास्तिक हूँ,

मेरी भी भावनाएँ आहत होती हैं—

जब मैं देखता हूँ,

पत्थर की 'देवी' के चरणों में झुके हुए लोग

बाहर निकलकर एक जीवित स्त्री की

अस्मिता और अस्तित्व को रौंद देते हैं।


मैं नास्तिक हूँ,

मेरी भी भावनाएँ आहत होती हैं—

जब मैं देखता हूँ,

बीमारी से तड़पते हुए किसी लाचार को

अस्पताल के बजाय ले जाया जाता है

किसी ढोंगी के डेरे पर 'चमत्कार' की उम्मीद में।


मैं नास्तिक हूँ,

मेरी भी भावनाएँ आहत होती हैं—

जब मैं देखता हूँ,

जीते-जी माता-पिता को पानी तक न पूछने वाले

मरने के बाद पंडितों को छप्पन भोग खिलाकर

स्वर्ग में उनका पेट भरने का पाखंड करते हैं।


मैं नास्तिक हूँ,

मेरी भी भावनाएँ आहत होती हैं—

जब मैं देखता हूँ,

एक बेजुबान जानवर की गर्दन पर चलती छुरी

और उसे 'बलि' का पवित्र नाम देकर

एक दयालु ईश्वर को खुश करने का दावा हैं।


मैं नास्तिक हूँ,

मेरी भी भावनाएँ आहत होती हैं—

जब मैं देखता हूँ,

कि इंसानियत से बड़ा धर्म का झंडा हो गया है,

और विवेक की जगह 'श्रद्धा' ने ले ली है

ताकि सवाल पूछने की हिम्मत को दफनाया जा सके।


नास्तिकता चुनाव नहीं, विकल्प है...

और यह विकल्प बहुत अच्छा है।

— संदीप कुमार

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