Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps May 22, 2018 पेड़ काटने आये हैं कुछ लोग, मेरे गाँव में ...!! अभी धूप बहुत तेज है कहकर बैठे हैं उसकी छाँव में.....!! Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
जोग ठगौरी ब्रज न बिकैहै July 02, 2018 जोग ठगौरी ब्रज न बिकैहै। यह ब्योपार तिहारो ऊधौ, ऐसोई फिरि जैहै॥ यह जापै लै आये हौ मधुकर, ताके उर न समैहै। दाख छांडि कैं कटुक निबौरी को अपने मुख खैहै॥ मूरी के पातन के केना को मुकताहल दैहै। सूरदास, प्रभु गुनहिं छांड़िकै को निरगुन निरबैहै॥ - सूरदास Read more
संदेसो दैवकी सों कहियौ July 17, 2018 संदेसो दैवकी सों कहियौ। `हौं तौ धाय तिहारे सुत की, मया करति नित रहियौ॥ जदपि टेव जानति तुम उनकी, तऊ मोहिं कहि आवे। प्रातहिं उठत तुम्हारे कान्हहिं माखन-रोटी भावै॥ तेल उबटनों अरु तातो जल देखत हीं भजि जाते। जोइ-जोइ मांगत सोइ-सोइ देती, क्रम-क्रम करिकैं न्हाते॥ सुर, पथिक सुनि, मोहिं रैनि-दिन बढ्यौ रहत उर सोच। मेरो अलक लडैतो मोहन ह्वै है करत संकोच॥ - सूरदास Read more
निसिदिन बरसत नैन हमारे। June 24, 2018 निसिदिन बरसत नैन हमारे। सदा रहत पावस ऋतु हम पर, जबते स्याम सिधारे।। अंजन थिर न रहत अँखियन में, कर कपोल भये कारे। कंचुकि-पट सूखत नहिं कबहुँ, उर बिच बहत पनारे॥ आँसू सलिल भये पग थाके, बहे जात सित तारे। 'सूरदास' अब डूबत है ब्रज, काहे न लेत उबारे॥ - सूरदास Read more
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