दिल जलाने की आदत उनकी आज भी नहीं गयी;
वो आज भी फूल बगल वाली कबर पर रख जाते हैं।

Comments

Popular posts from this blog

अबिगत गति कछु कहति न आवै

मीठा जल

मैं नास्तिक हूँ